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नगांव (असम), 31 जनवरी (हि.स.)। जिले के बटद्रवा स्थित महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव की जन्मभूमि की विरासत हतीपुखुरी (तालाब) में प्रकृति प्रेमी लोगों ने बुधवार को दुर्लभ प्रजाति के एक बड़े कछुए को संरक्षित करने के उद्देश्य से छोड़ा। बटद्रवा थान (मठ) प्रबंध समिति ने गुरुजन के जन्मस्थान पर दुर्लभ प्रजाति के कछुए को संरक्षित करने के उपाय करने के लिए राज्य सरकार से मदद मांगी है।
नगांव के सिंगिया पोतनी तेलिया गांव से दुर्लभ प्रजाति के एक बड़े कछुए को लेकर गांव की महिलाएं बटद्रवा थान पहुंचीं। सिंगिया पोतनी तेलिया गांव के एक तालाब से दुर्लभ प्रजाति के कछुए को लाकर उसे संरक्षित करने के उद्देश्य से प्रकृति प्रेमी पद्म कांत शर्मा, दीपा शर्मा के साथ ही गांव की अन्य महिलाएं बटद्रवा थान पहुंचकर ऐताहिसाक हातीपुखरी में कछुए को छोड़ दिया। इस मौके पर बटद्रवा थान प्रबंध समिति के सदस्य पंकज बरुवा, बटद्रवा थान के नामाचार्य देवेन आते और हतीबहा के वैष्णव भक्तों की उपस्थिति रहे।
उल्लेखनीय है कि वर्तमान समय में जब लोगों का एक वर्ग प्रकृति और जीवों को नष्ट करके पर्यावरण को खतरे में डाल रहा है, ऐसे समय में 30 किमी दूर गांव से प्रकृति प्रेमी महिलाओं ने एक जीव के संरक्षण के लिए कदम उठाया जाना सराहनीय कदम है।
हिन्दुस्थान समाचार/ अरविंद/सुनील