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रायबरेली, 21जनवरी(हि.स.)। प्रभु श्री राम की प्राण प्रतिष्ठा सोमवार को होनी है, जिसका इंतज़ार सभी को है लेकिन जिन कारसेवकों ने अपना समय, धन और जीवन लगाया है उनके लिए यह अवसर अमूल्य है। इन्हीं में एक कारसेवक ऐसे भी थे, जिन्होंने लाखों का नुकसान करके रामकाज़ में जेल जाना स्वीकार किया और आज उनके लिए यह अवसर राम की कृपा से मिला है।
कारसेवकों के संघर्ष और जिजीविषा का आलम यह था है कि लोगों ने अपनी रोजी-रोटी की परवाह नहीं की और रामकाज़ के लिये सब कुछ छोड़ जेल चले गए। रायबरेली जिले के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ अमरनाथ त्रिपाठी की कहानी कुछ ऐसी ही है। कानपुर मेडिकल कॉलेज से एमडी(मेडिसिन) में गोल्डमेडिलिस्ट डॉ. त्रिपाठी शुरू से सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के पक्षधर रहे हैं। आरएसएस की शाखाओं से शुरुआत करके वह राममंदिर आंदोलन से जुड़ गए।
विहिप द्वारा चलाये गए कई आंदोलनों में उनकी सक्रियता रही। ऊंचाहार में अच्छी-खासी प्रैक्टिस की परवाह न करके वह राममंदिर के आंदोलनों से जुड़े रहे। वह विश्व हिंदू परिषद के ब्लाक अध्यक्ष भी रहे। डॉ अमरनाथ त्रिपाठी के अनुसार वर्ष 1990 में राम जन्मभूमि आंदोलन अपने चर्मोत्कर्ष पर था। शिला पूजन कार्यक्रम के दौरान 3 अक्टूबर 1990 को उन्हें गिरफ्तार कर रायबरेली जेल में डाल दिया गया। और 28 दिन बाद जेल से उनकी रिहाई हुई। बाद में बाकी उनके तीन और साथी भी गिरफ्तार कर जेल पहुंचे।
डॉ अमरनाथ त्रिपाठी ने हिन्दुस्थान समाचार को बताया कि आज भगवान श्रीराम का जब भव्य मंदिर में 22 जनवरी को मंदिर में स्थापित होने वाली मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा हो रही है। यह दिन उनके लिए अमूल्य है, भगवान राम की कृपा से ही यह अवसर उन्हें मिल रहा है।
हिन्दुस्थान समाचार/रजनीश/राजेश