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– श्रीराम-जानकी को झूला झुलाने से मिलता है मोक्ष
अयोध्या, 11 जनवरी (हि.स.)। धर्म नगरी अयोध्या केवल भगवान श्रीराम के जन्म के लिए ही नहीं जानी जाती, बल्कि यह मोक्षदायिनी है। यह संभव होता है मणि पर्वत से शुरू भगवान श्रीराम और माता जानकी को झूला झुलाने के उत्सव से। यह एक उत्सव-मेला है। यह उत्सव-मेला लगभग पूरे श्रावण माह चलता है।
सावन मेले का शुभारम्भ शुक्ल पक्ष तृतीया को अयोध्या-स्थित ‘मणिपर्वत’ पर श्रीराम-जानकी को झूला-झुलाकर किया जाता है। यह, साधु-संतों-महंतों-श्रद्धालु गृहस्थों का एक पारंपरिक मेला है। साहित्य भूषण से सम्मानित साहित्यकार प्रमोदकांत मिश्र बताते हैं कि श्रीअयोध्या के विभिन्न मंदिरों से सीता-राम के चल-विग्रहों को उत्सवपूर्वक शोभा यात्राओं के साथ मणिपर्वत लाया जाता है। यहां अवस्थित वृक्षों की शाखाओं पर मंदिरों से गाजे-बाजे के साथ लाये गये श्रीराम-जानकी के चल विग्रहों को झूलारूढ़ किया जाता है और भक्ति के साथ झूले की पेंगें मारी जाती हैं। सूर्यास्त के साथ ही यहां के झूला-दोलन का उत्सव समाप्त हो जाता है और सीताराम के विग्रहों को संबंधित मंदिरों में झूलारूढ़ कर दिया जाता है। सावन झूला-मेला पूर्णिमा तक चलता हुआ श्रीसरयू पूर्णिमा स्नान के पश्चात उपशम को प्राप्त होता है।
राममय हो जाती है आयोध्या
श्रावण मास में पूरी अयोध्या राममय हो जाती है। चारों ओर श्रीराम जय राम, जय जय राम का महामंत्र गूँजता है और उत्साहित व उल्लसित श्रद्धालु नाचने गाने में मग्न रहते हैं। लाखों की संख्या में विदेशी श्रद्धालु और पर्यटक भी यहां मोक्ष की आशा में आते हैं। पूरे सावन मेले का आनंद तो लेते ही हैं, भगवान श्रीराम और माता जानकी को झूला झुलाकर जीवन मरण के बंधन से मुक्ति का आशीर्वाद भी लेते हैं।
हिन्दुस्थान समाचार/डॉ. आमोदकांत /दिलीप
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