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गोरखपुर, 16 जनवरी (हि.स.)। गोरखपुर स्थित महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के अध्यक्ष एवं पूर्व कुलपति प्रोफेसर उदय प्रताप सिंह (यूपी सिंह) ने मंगलवार को कहा कि 22 जनवरी को एक राष्ट्रीय और सांस्कृतिक पर्व के रूप में मनाया जाना चाहिए। उन्होंने गोरखनाथ पीठ के योगदानों की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि गोरक्षपीठ ने अयोध्या के श्रीराम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया है। इस निर्माण में पीठ की तीन पीढ़ियों के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है।
यूपी सिंह ने कहा कि सभी जानते हैं कि श्रीराम मन्दिर के निर्माण में गोरक्षपीठ की अग्रणी भूमिका रही है। श्रीराम जन्मभूमि की प्राण-प्रतिष्ठा के समय ब्रह्मलीन परमपूज्य महन्त अवेद्यनाथ जी महाराज एवं विश्व हिन्दू परिषद के अन्तर्राष्ट्रीय पूर्व अध्यक्ष स्व. अशोक सिंघल जी की पावन स्मृतियां मन को झकझोर देती हैं। अशोक सिंघल का कथन था कि यदि देश के सम्पूर्ण संत किसी एक व्यक्ति के मार्गदर्शन में एक मंच पर आ सकते हैं तो वह हैं गोरक्षपीठाधीश्वर महन्त अवेद्यनाथ जी महाराज। स्व. कोठारी बन्धु की पावन स्मृति भी मन को द्रवित कर देती है। उन्होंने कहा कि अयोध्या में राम मन्दिर निर्माण ब्रह्मलीन महन्त दिग्विजयनाथ जी महाराज, ब्रह्मलीन महन्त अवेद्यनाथ जी महाराज एवं वर्तमान गोरक्षपीठाधीश्वर महन्त योगी आदित्यनाथ जी महाराज की प्रेरणा, प्रयास, संकल्प एवं मार्गदर्शन से सम्भव हो पाया। 22 जनवरी को प्रतिवर्ष एक राष्ट्रीय एवं सांस्कृतिक पर्व के रूप में मनाया जाना चाहिए। आज हमें त्रेतायुग का वह अनुष्ठान याद आता है, जब भगवान विष्णु के अवतार मर्यादापुरुषोत्तम श्रीराम ने रामेश्वरम् में शिव मन्दिर की स्थापना की, जिसकी प्रेरणा के फलस्वरूप लंका विजय और फिर, रामराज्य की स्थापना हुई। आज उसी अनुष्ठान के समानान्तर भगवान शिव के अवतार महायोगी गोरखनाथ के गोरखपुर स्थित पीठ एवं वहां के पूज्य पीठाधीश्वरों की प्रेरणा, प्रयास, संकल्प, मार्गदर्शन एवं आशीर्वाद से अयोध्या में भगवान श्रीराम मन्दिर का निर्माण हो रहा है। यह भारत वर्ष के सुखद, समृद्धि एवं वैभवशाली भविष्य का संकेत है। आइये, हम सब अपने-अपने घरों में दीप जलाकर इस मंगलमय अवसर का स्वागत करें एवं पुण्य अर्जित करें।
हिन्दुस्थान समाचार/डॉ. आमोदकांत /दिलीप