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उज्जैन,13मार्च(हि. स.)। नगर निगम के राजस्व एवं अन्य कर विभाग के पास इस बात की जानकारी पिछले तीन वर्ष से नहीं है कि नगर निगम सीमा में कितने अतिक्रमण अस्थायी हैं? विभाग के पास यह जानकारी भी नहीं है कि शहर में कितने स्थायी अतिक्रमणों से आय होती है? क्षेत्र अनुसार यह जानकारी न होते हुए विभाग के पास केवल मासिक आय की जानकारी है।
इन बातों को लेकर हमेशा से राजस्व एवं अन्य कर विभाग पर शहरवासियों की अंगुलियां उठती रहती है। लोगों के मन में यह जिज्ञासा रहती है कि शहर में इतने सारे अतिक्रमण हैं, रोजाना नए अतिक्रमण कहीं भी देखने को मिल जाते हैं। इसके बावजूद निगम के जिम्मेदार हमेशा यही कहते हैं कि निगम की आय लगातार घट रही है। निगम के पास विकास कार्यों को करने एवं जो कार्य हो चुके हैं,उनके भुगतान करने के लिए रूपए नहीं है।
यह है विभाग के हाल…
एक शहरवासी द्वारा जब सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी गई तो जवाब में सहायक आयुक्त अन्यकर द्वारा जारी किए गए सिंगल पेज पर लिखा गया-नगर पालिक निगम,उज्जैन सीमा क्षेत्र में अवैध रूप से स्थापित ठेले,गुमटियों आदि अस्थायी प्रकृति की होने से इस प्रकार का किया गया अस्थायी अतिक्रमण को सूचिबद्ध नहीं किए जाने से यह जानकारी उपलब्ध नहीं है।
यह है अंदर की बात…घूरता है आम आदमी वसूलीवालों को
इधर राजस्व एवं अन्यकर विभाग के बाजार वसूली में तैनात कतिपय कर्मचारियों से अनौपचारिक चर्चा की जाती है तो वे चौंकानेवाले तथ्य देते हैं। उनके अनुसार सबसे अधिक वसूली इन्ही अस्थायी अतिक्रमण से विभाग को प्रतिदिन हो रही है। वे बताते हैं कि शहर के प्रमुख चौराहों से लेकर गलियों-मौहल्लों के कार्नर तथा अंदर तक अस्थायी अतिक्रमण गाजर घास की तरह बढ़ गए हैं। इतनी तादात में हो गए हैं कि हम बाजार वसूली के लिए जाते हैं तो मौहल्लों के लोग अब हमें घूरने लग गए हैं। कुछ तो ताना कस देते हैं। कहते हैं- मन नहीं भरा हो तो बीच सड़कों पर सजवा लो हाथ ठेले। अपने घर से चौराहों तक पैदल निकलना मुश्किल हो गया है। नगर निगमवाले आखिर करते क्या हैँ।
एक कर्मचारी इस प्रतिनिधि को हंसते हुए दावा करता है-साहब,कुछ मत पूछो। उपरवालों को तो बस वसूली चाहिए। उन्हें इस बात से कोई मतलब नहीं कि कहां से आ रही है वसूली। अब टारगेट तो बहुत पीछे छूट गए हैं। कर्मचारी के अनुसार जो सबसे अधिक वसूली लाता है,वही राजदुलारा होता है विभाग का। ऐसे में सालों तक सबसे अधिक अतिक्रमणवाले हिस्सों में ड्यूटी लगातार कायम रहती है,तबादला नहीं होता है। हंसकर कहता है-आप चौकोंगे तो नहीं? सुनो,हमारा काम वसूली करना है,अतिक्रमण हटाना नहीं। अतिक्रमण हटाने के लिए अलग से है निगम में एक विभाग। उनकी जिम्मेदारी है कि अतिक्रमण न होने दें। हम तो जहां अतिक्रमण दिखेगा,जुर्माना राशि की कम से कम 20 रू. की रसीद काटेंगे। अपना काम हो गया।
हिंदुस्थान समाचार/ललित ज्वेल