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मंडी, 01 मार्च (हि.स.)। अंतर्राष्ट्रीय मंडी शिवरात्रि के दौरान नागा साधुओं के जुलूस को लेकर देव समाज विरोध में खड़ा हो गया है। इसे देव संस्कृति और मंडी शिवरात्रि की परंपराओं के खिलाफ करार देते हुए प्रशासन से इसकी अनुमति न देने की अपील की है। सर्व देवता सेवा समिति की कार्यकारिणी की बैठक शिव पाल शर्मा अध्यक्ष सर्व देवता सेवा समिति जिला मंडी की अध्यक्षता में देव सदन- संस्कृति सदन में आयोजित की गई ।
शिव पाल शर्मा ने बताया कि सोशल मीडिया के माध्यम से ज्ञात हुआ कि महंत भूतनाथ मंदिर द्वारा शिवरात्रि के दौरान जो नागा साधुओं का जुलूस निकालने की बात जा रही है। उसका देव समाज कड़ा विरोध करता है। उन्होंने कहा कि शिवरात्रि के दौरान देवी-देवताओं के साथ ग्रामीण क्षेत्रों से हजारों के हिसाब से लोग महिलाएं और पुरूष आते हैं। ऐसे नागा साधुओं प्रदर्शन को देख कर ठेस पहुंचती है और लज्जा का विषय बनता है। जिससे देव संस्कृति पर उसका दुष्प्रभाव पड़ता है। इसका समस्त देव समाज कड़ा विरोध करता है और प्रशासन से अनुरोध है कि इसकी अनुमति न दी जाए।
वहीं पर धर्म संघ, भूतनाथ मंदिर, मंडी की कार्यकारणी की आपात बैठक भूतनाथ कार्यालय में, प्रधान भीम चंद सरोच की अध्यक्षता में आयोजित कि गई। इस बैठक में धर्म संघ के प्रधान सरोच ने बताया कि समाचार पत्रों के माध्यम से ज्ञात हुआ कि भूत नाथ मंदिर के महंत द्वारा शिवरात्रि महोत्सव के दौरान नागा साधुओं का जुलूस निकालने का प्रयास किया रहा है। हालांकि, प्रशासन द्वारा इस जलूस को निकालने की अनुमति नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि मंडी में सदियों से ऐसी कोई भी परंपरा नहीं है।
धर्मसंघ ने उपायुक्त को इस बारे ज्ञापन देने की बात कही है। क्योंकि शिवरात्रि मेला में नागा साधुओं के जुलूस निकालने की कोई परंपरा नहीं है। धर्म संघ, भूत नाथ मंदिर द्वारा शिवरात्रि उत्सव में महंत द्वारा प्रस्तावित नागा साधुओं के जुलूस का कड़ा विरोध किया है। वहीं प्रशासन से अनुरोध करता है कि सदियों से स्थापित परंपरा को न तोड़ा जाए।
बैठक में सर्व देवता सेवा समिति के अध्यक्ष शिव पाल शर्मा , वरिष्ठ उपाध्यक्ष हरीश वैद्य , रवि वैद्या, जी सी सैनी, मुरारी लाल शर्मा , रेवती शर्मा, अनिल शर्मा, प्रकाश कश्यप, गीतांजलि शर्मा, खेम राज गुप्ता, नीरज हांडा , शमशेर मिन्हास, नरेश धीमान, मोहिंद्र राना, राजेंद्र ठाकुर, अजय सहगल आदि ने भाग लिया। इधर, एसडीएम सदर ओमकांत ठाकुर ने मंडी वासियों से अपील की है कि मंडी महाशिवरात्रि पर्व को सफल बनाने के लिए जिला प्रशासन प्रयास कर रहा है। लेकिन, मंडी की संस्कृति की रक्षा के लिए बाबा भूतनाथ मंदिर के इस महंत द्वारा पैदा की गई बाधाओं और मुद्दों को गंभीरता से लिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि धार्मिक-सांस्कृतिक मान्यताओं के आधार पर अखिल भारतीय समानता नहीं हो सकती। जैसे मैसूर दशहरा कुल्लू दशहरा से अलग है और प्रयागराज कुंभ नासिक से अलग है। उज्जैन के महाकाल की सांस्कृतिक परंपराएं और पूजा-पद्धति काशी विश्वनाथ से भिन्न है।
हिन्दुस्थान समाचार/मुरारी/ सुनील/उज्जवल