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धर्मशाला, 27 फरवरी (हि.स.)। तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा की नगरी मैकलोड़गंज स्थित मुख्य बौद्ध मठ चुगलाखांग में आत्मदाह करने वाले तिब्बतियों के लिए मंगलवार को तिब्बत संग्रहालय द्वारा प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। इस प्रदर्शनी के माध्यम से आत्मदाह करने वाले तिब्बतियों के लिए श्रद्धाजंलि भी दी गई। प्रदर्शनी का उद्घाटन निर्वासित तिब्बती संसद की उपसभापति डोलमा सेरिंग ने किया। प्रदर्शनी का शीर्षक ‘द बर्निंग क्वेश्चन-तिब्बती आत्मदाह की ओर क्यों बढ़ रहे हैं’ रखा गया था। इस मौके पर आत्मदाह करने वालों के सम्मान में दीपक भी जलाए गए।
उधर प्रदर्शनी का उद्घाटन करने के बाद उपसभापति डोलमा सेरिंग ने मीडिया से बातचीत करते हुए तिब्बत में वर्तमान स्थिति पर रोष जताते हुए कहा कि चीन तिब्बतियों को कठोर नीति के विरोध में खुद को जलाने के लिए मजबूर कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस प्रदर्शनी का मकसद चीन का तिब्बत की वास्तविक स्थिति की ओर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित करना है।
उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शनी आत्मदाह करने वालों तिब्बतियों की आकांक्षाओं पर प्रकाश डालती है और तिब्बत के तीन प्रांतों में आत्मदाह स्थलों को प्रदर्शित करने वाला एक नक्शा पेश करती है। यह प्रदर्शनी तिब्बत में पहले तिब्बती आत्मदाह की 15वीं वर्षगांठ का भी प्रतीक है। 15 वर्ष पूर्व इसी दिन वर्ष 2009 में कीर्ति मठ के टेपी ने आत्मदाह कर लिया था जोकि पहला आत्मदाह था। उन्होंने बताया कि तिब्बत की आजादी और चीन की कठोर नीतियों के खिलाफ अब तक करीब 150 से अधिक तिब्बती आम्दाह कर चुके हैं।
हिन्दुस्थान समाचार/सतेंद्र/सुनील