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सहरसा,05 फरवरी (हि.स.)। गायत्री शक्तिपीठ में व्यक्तित्व परिष्कार सत्र का आयोजन किया गया।सत्र को संबोधित कर डाक्टर अरुण कुमार जायसवाल ने शुक्रिया के महत्व को बताते हुए कहा जिस गॉड को आप मानते हों उसे कहो शुक्र है भगवान का।हरेक इन्सान के पास कुछ न कुछ है।जिसका हम शुक्र अदा करते हैं वह बढ़ता है।
शुक्र का मतलब है जिसके कारण हम कुशलता की ओर हैं।उसके प्रति कृतज्ञता का भाव हीं शुक्रिया है।सबसे महत्वपूर्ण बात यह है-जो बुरे समय में आपका साथ दिया है उन्हें याद रखें।कहां से क्या सहायता मिली शुक्र करो उपरवाले का जो इस गायत्री माता के मंदिर में हम प्रार्थना ध्यान करते हैं।
भगवान हीं एक से अधिक रुप में होकर हमें मदद करते हैं।शुक्रिया हृदय की गहराई से होनी चाहिए। शुक्रिया अलौकिक शब्द है।हमारी आत्मा जब जाग्रित है तभी हम कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।यदि हम भगवान का शुक्रिया अदा करते हैं तो उसके प्रकाश से हमारा जीवन प्रकाशित हो जाता है।शुक्रिया अदा करना हमारी प्रकृति होनी चाहिए।
हिन्दुस्थान समाचार/अजय/चंदा