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उज्जैन, 6 फरवरी(हि. स.)। उज्जैन विभाग में अखिल भारतीय अधिकारी प्रवास के निमित्त विभाग के महाविद्यालयीन विद्यार्थी स्वयंसेवकों का प्रकट कार्यक्रम मंगलवार सायं 4 बजे उत्कृष्ट विद्यालय के सामने स्थित शास्त्रीनगर खेल मैदान पर आयोजित हुआ। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सहसरकार्यवाह रामदत्त चक्रधर उपस्थित हुएl उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि य़ह कालखंड बहुत महत्त्व का कालखंड है। प्रभु श्री राम की प्राण प्रतिष्ठा अयोध्या में 22 जनवरी को संपन्न हुई है। इससे न केवल भारत अपितु सारी दुनिया के अंदर एक आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ है।
उन्होंने कहा कि ऐसे समय में महाविद्यालयीन छात्रों का प्रकट कार्यक्रम हम सब लोगों के लिए प्रेरणादायी है l सब प्रकार की प्रतिकूलताओ में दुनिया को दिशा देने वाला, मार्ग दर्शन करने वाला हमारा भारत वर्ष रहा हैं। वैसा भारत फिर से बने उसके पिछले 98 वर्षों से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की साधना चल रही है।
उन्होंने कहा कि 1925 में जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रारम्भ हुआ तब स्वयंसेवक के नाम पर एक ही स्वयंसेवक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जी थे। आज जब 2024 में विचार करते है तो लाखों स्वयंसेवक है। इसी मालवा प्रांत में 2013 में इंदौर में एकत्रीकरण हुआ था, उसमें प्रांत से ही एक लाख स्वयंसेवक पूर्ण गणवेश में उपस्थित हुए थे। देश भर में ऐसे लाखों स्वयंसेवक हैं। संगठन के नाम पर 1925 में एक ही संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ था। आज देश के अंदर स्वयंसेवक के द्वारा चलने वाले संगठन 40 से अधिक संगठन राष्ट्रव्यापी स्तर के चल रहे हैं। उस समय एक ही शाखा थी मोइते नागपुर में आज 65 हजार से अधिक शाखाएं हैं। हम सब जानते हैं कि अपना देश बहुत बड़ा है। जैसा भारत का गौरवशाली अतीत था वैसा भारत फिर से बनना चाहिए इसके लिए हम सब प्रयत्नशील है।
इससे पहले कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे अवंतिका विश्वविद्यालय कुलपति डॉ. नितिन राणे ने अध्यक्षीय उद्बोधन दिया। इस अवसर पर बलराज भट्ट भी उपस्थित हुए। प्रकट कार्यक्रम में उज्जैन विभाग के 200 से अधिक महाविद्यालयीन विद्यार्थी स्वयंसेवकों ने सहभागिता कर आसन, योग सामुहिक समता का प्रदर्शन किया।
भारत सत्य के साथ में है, इसलिए आज ट्रेंड सेटर
मुख्य वक्ता रामदत्त चक्रधर ने कहा कि आज दुनिया की जो परिस्थिति है, उसमें रूस-यूक्रेन युद्ध चलते- चलते लगभग 2 साल से ज्यादा हो गया। उसके बाद फिलिस्तीन और इजराइल का युद्ध शुरू हो गया। कोई न कोई देश किसी न किसी के साथ खड़ा हुआ दिखाई देता है। लेकिन भारत वर्ष की स्थिति ऐसी है कि भारत का सम्बंध रूस, यूक्रेन, इजराइल और फिलिस्तीन से भी है। भारत किसी के पक्ष में हैं और न विपक्ष में है।भारत केवल सत्य के साथ में है, जो सबको साथ में लेकर चल सकता है उसके साथ में है। इसलिए भारत की भूमिका आज इस प्रकार की है जैसे ट्रेंड सेटर हो गया हो भारत। इसलिए आज दुनिया को लगता है भारत को मध्यस्थ करनी चाहिए। भारत का प्राचीन चिंतन वसुदेव कुटुम्बकम अर्थात सारी पृथ्वी ही हमारा परिवार है। भारत केवल अपने बारे में विचार नहीं करता है। भारत सम्पूर्ण विश्व का विचार करता है। य़ह केवल शब्द नहीं प्रत्यक्ष व्यवहार में भी दिखता है। भारत ने कभी भेदभाव नहीं किया। वसुदेव कुटुम्बकम शब्दों में नहीं व्यवहार और आचरण दोनों में ही है। इसलिए भारत जो बोलता है वह करके भी दिखाता है। आज भारत सैन्य दृष्टि से शक्तिशाली हुआ है। आर्थिक क्षेत्र और तकनीकि क्षेत्र में भी आगे बढ़ रहा है।
दुनिया में हिंदुत्व का प्रभाव बढ़ रहा
चक्रधर ने कहा कि भारत का तत्व ज्ञान और चिंतन सब श्रेष्ठ है। आज भारत वर्ष की दुनिया के अंदर शाख बड़ी है। इतना ही नहीं हिंदुत्व का प्रभाव भी दुनिया के अंदर बढ़ता हुआ दिखाई देता है। पहले हिंदू को दोयम दर्जे का नागरिक कहते थे। आज न केवल भारत सारी दुनिया के अंदर हिंदुत्व का प्रभाव दिखाई देता है। एक कालखंड था जब लोग कहते थे भगवा तो आतंकवाद है। भगवा आतंकवाद का प्रतीक नहीं अपितु भगवा हमारे देश की पवित्रता का प्रतीक है। दुनिया में हिंदू संस्कृति का बढ़ता प्रभाव इस बात द्योतक है।
हिन्दुस्थान समाचार/ललित ज्वेल/मुकेश