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जम्मू, 16 जनवरी (हि.स.)। पूर्व एमएलसी और भाजपा के जेके यूटी प्रवक्ता गिरधारी लाल रैना ने कश्मीर घाटी के विस्थापित अल्पसंख्यक समुदाय से संबंधित पंचों, सरपंचों और यूएलबी पार्षदों द्वारा निभाई गई रचनात्मक भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उस समय वास्तविकता को साकार किया जब तथाकथित मुख्यधारा के राजनीतिक दलों ने जमीनी स्तर पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया का बहिष्कार करने का फैसला किया। जीएल रैना, विस्थापित अल्पसंख्यक समुदाय से संबंधित पूर्व पंचों, सरपंचों और यूएलबी पार्षदों की एक बैठक में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि इन समर्पित साहसी लोगों ने व्यक्तिगत जोखिम उठाया और 2018 में अपने-अपने स्थानों पर चुनाव लड़ने के लिए कश्मीर वापस चले गए। पांच साल तक उन्होंने उन निर्वाचन क्षेत्रों में सेवा की, जहां वे 1989-90 में जबरन विस्थापन के बाद नहीं रह रहे थे। पूर्व एमएलसी ने कहा, उनके अनुभवों को सुनना और उनके समर्पण, ईमानदारी और नैतिक पारदर्शिता के लिए आम लोगों से मिली सराहना प्रेरणादायक और उत्साहवर्धक है।
उन्होंने आगे कहा कि उन्होंने अंतर-सामुदायिक इंटरफेस और संबंधों को काफी हद तक पुनर्जीवित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जो पलायन के बाद की अवधि में बाधित हो गया था और विभिन्न कारणों से तनाव में बना हुआ है।
हिन्दुस्थान समाचार/राहुल/बलवान