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गोरखपुर: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में सनसनीखेज घटना सामने आई है। यहां अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) गोरखपुर के प्रशासनिक अधिकारी पर वहीं एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही छात्रा का यौन शोषण करने का आरोप है। मामले की जांच के लिए कार्यकारी निदेशक और मुख्य कार्यपालक ने नौ सदस्यीय विशाखा कमेटी का गठन किया है, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
छात्रा अक्टूबर में मेस में मिल रहे खराब खाने की शिकायत को लेकर प्रशासनिक अधिकारी के पास अन्य छात्राओं के साथ गई थी। उसके बाद से ही प्रशासनिक अधिकारी उसके पास फोन करने लगा और मिलने का बहाना ढूंढने लगा। एक दिन उसने अपने कमरे में बुलाया। यह घटना बीते 18 दिसंबर की है और उसके साथ जबरदस्ती करने लगा। छात्रा एवं परिजनों का आरोप है कि प्रशासनिक अधिकारी ने उसके साथ दुष्कर्म किया।
घरवालों का आरोप है कि रेप की घटना के बाद छात्रा अवसाद में चली गई थी। साथ ही चार दिन तक उसने अपने आप को कमरे में बंद कर लिया। तबीयत बिगड़ने के बाद उसकी मां का फोन आया तो उसने उनको सारी घटना बताई। माता-पिता एम्स पहुंचे और बेटी को मानसिक विभाग में भर्ती करवाकर इलाज करवाया। साथ ही कार्रवाई की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली।
इसी बीच, नए कार्यकारी निदेशक के रूप में प्रोफेसर गोपाल कृष्ण पाल ने यहां ज्वाइन कर लिया। नौ जनवरी को जैसे ही वह परिसर में आए उनको जानकारी हुई तो वे तत्काल छात्रा उसके माता-पिता से मिले और पूरी स्थिति की जानकारी होते ही उन्होंने कमेटी का गठन कर दिया। साथ ही आश्वस्त किया कि यदि मामला सत्य पाया गया तो प्रशासनिक अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही छात्रा और परिवार की सुरक्षा के लिए गार्ड की तैनाती भी कर दी गई। आरोपी प्रशासनिक अधिकारी जब इन सब स्थितियों से अवगत हुआ तो तत्काल परिसर पहुंचा और दबाव बनाने का एक बार फिर प्रयास किया।
लेकिन जैसे ही निदेशक को जानकारी हुई, उन्होंने उसके परिसर में प्रवेश पर ही रोक लगा दी। साथ ही उसके कक्ष में ताला बंद करवाकर गार्ड की तैनाती कर दी। यह निर्देश भी दिया कि कमेटी जब भी बुलाएगी तो आकर सहयोग करना पड़ेगा। शहर छोड़ कर भी आपको कहीं नहीं जाना है। कमेटी में डॉक्टर संगीता, डॉक्टर प्रीति बाला, डॉक्टर महेश मित्तल, डॉक्टर अलका, डॉ रीना समेत कुल नौ सदस्य शामिल हैं।
आरोपी प्रशासनिक अधिकारी की तैनाती परिसर में वर्ष 2021 में हुई थी। वहीं, कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर गोपाल कृष्ण पाल ने कहा कि वरिष्ठ अधिकारी पर लगे आरोप को हम गंभीरता से ले रहे हैं। इसकी जांच के लिए नौ सदस्यों की विशाखा कमेटी गठित कर दी गई है। प्रशानिक अधिकारी जांच को प्रभावित न कर सकें इसके लिए उनके परिसर में प्रवेश व शहर से बाहर जाने पर रोक लगा दी गई है। दोषी पाए जाने पर बेहद सख्त कार्रवाई की जाएगी।